Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way






























Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने दाएँ हाथ में रेशम या रेशमी कपड़े का एक टुकड़ा और दाएँ हाथ में सोना या सोना जैसा ज़ेवर आदि लिया और उसके बाद फ़रमाया : निस्संदेह रेशम और सोना पहनना पुरुषों पर हराम है। अलबत्ता औरतों के लिए हलाल है।
सहाबा नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ एक यात्रा में थे। संंभवतः वह यात्रा मक्का विजय की रही होगी। कुछ सहाबा रोज़े से नहीं थे और कुछ रोज़े से थे। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दोनों को अपने-अपने हाल पर रहने दिया। एक दिन गरमी बड़ी सख़्त थी। सब लोग यात्रा की थकावट और दोपहर की गरमी से त्रस्त होकर आराम के लिए एक जगह रुके। गरमी सख़्त थी, इसलिए गरमी और प्यास से निढाल होकर रोज़ेदार गिर पड़े और कोई काम न कर सके। जबकि जो लोग रोज़े से नहीं थे, वे उठे और ख़ेमे लगाए, ऊँटों को पानी पिलाया और अपने रोज़ेदार भाइयों की सेवा की। जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनके कार्य और सेना की सेवा को देखा, तो उनकी हिम्मत बढ़ाई और उनकी फ़ज़ीलत तथा अधिक प्रतिफल प्राप्त करने का बखान करते हुए कहा कि आज रोज़ा न रखने वाले ही नेकी ले गए।
जब उच्च एवं महान अल्लाह ने अपने नबी को हुनैन युद्ध में विजय दिलाई, बहुत-सा माल-ए-ग़नीमत दिया और आप ताइफ़ का मुहासरा छोड़ने के बाद माल-ए-ग़नीमत के पास आए तथा ऐसे लोगों को उसमें से दिया, जो नए-नए मुसलमान हुए थे, ताकि उन्हें क़रीब लाया जा सके, तो कुछ अंसार ने इसपर आपत्ति जताई। जबकि बड़े अंसारी सहाबा को पता था कि आपने जो कुछ किया है, सही किया है। जब आपको उनकी इस आपत्ति की सूचना मिली, जैसा कि किसी ने यह भी कह दिया था कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) माल-ए-ग़नीमत हमें छोड़कर ऐसे लोगों को दे रहे हैं, जिनका ख़ून हमारी तलवारों से अभी भी टपक रहा है! तो आपने उन्हें एक चबूतरे में जमा होने का आदेश दिया। जब सब लोग एकत्र हो गए, तो आपने यहाँ से बात शुरू की कि यह कैसी बात है, जो तुम्हारे बारे में मुझ तक पहुँच रही है? फिर वह सारी बातें कहीं, जिसका ज़िक्र इस हदीस में है। आपने अपने संबोधन में उन्हें फटकारने के साथ-साथ उनके उस सहयोग की खूब सराहना की, जो उनकी ओर से आपको और आपके लाए हुए धर्म इसलाम को दिया गया था। ज़़ाहिर है, इससे वे प्रसन्न हो गए और अच्छी तरह जान गए कि अल्लाह ने अपने रसूल की संगित और आपको अपने साथ अपने घर ले जाने के सौभाग्य के रूप में उन्हें कितनी बड़ी नेमत प्रदान की है और साथ ही उनकी इन सेवाओं और क़ुरबानियों के बदले में आख़िरत में उनके लिए क्या कुछ तैयार कर रखा है। फिर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने आने वाले दिनों में उन्हें जिस भेदभाव का सामना करना है, उसपर सब्र से काम लेने का आदेश दिया।
अबू सईद खुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) क़द्र की रात की तलाश में रमज़ान के बीच के दस दिनों में ऐतिकाफ़ करते थे। एक साल अपनी आदत के मुताबिक़ ऐतिकाफ़ में थे कि जब इक्कीसवें रमज़ान की रात आई, जिसकी सुबह आप ऐतिकाफ़ से निकल जाया करते थे, तो आपको मालूम हुआ कि क़द्र की रात अंति दस दिनों में है। अतः, अपने साथियों से कहा : जिसने मेरे साथ बीच के दस दिनों में ऐतिकाफ़ किया है, वह अपना ऐतिकाफ़ जारी रखे और अंतिम दस दिनों में भी ऐतिकाफ़ करे। साथ ही बताया कि सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने आपको वह रात सपने में दिखा दी थी, लेकिन फिर उसे स्मृति से ग़ायब कर दिया। परन्तु, आपने सपने में उसकी कुछ निशानियाँ देखी थीं, जिनमें से एक यह है कि आप फ़ज्र की नमाज़ में पानी तथा कीचड़ पर सजदा कर रहे हैं। चुनांचे अल्लाह ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के इस सपने को सच कर दिखाया। इक्कीसवें रमज़ान की रात को बारिश हुई। आपकी मस्जिद चूँकि झोंपड़े की तरह थी। उसके खंबे खजूर के तनों के थे और छत उसकी शाखाओं की। इसलिए बारिश होने पर मस्जिद टपकने लगी और आपने इक्कीसवें रमज़ान की सुबह को पानी और कीचड़ पर सजदा किया।