





























Hadeeth Cards
Da'wa cards that highlight great meanings from the noble prophetic hadiths in a simple style and attractive display that helps the Muslim to have a deeper understanding of his religion in an easy way
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अली बिन अबी तालिब- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने खंदक़ की जंग के दिन फ़रमाया कि अल्लाह उनकी क़ब्रों तथा घरों को अग्नि से भर दे,जैसे उन्होंने हमें सूरज डूबने तक अस्र की नमाज़ से व्यस्त रखा। मुस्लिम के शब्दों में इक प्रकार है कि उन्होंने हमें बीच की नमाज़ -अस्र की नमाज़ से- व्यस्त रखा। फ़िर उसे मगरिब तथा इशा के बीच में पढ़ा। मुस्लिम ही में अब्दुल्लाह बिन मसऊद से वर्णित है, कहते हैं कि मुश्रेकों ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अस्र की नमाज़ पढ़ने का समय नहीं दिया ,यहाँ तक कि सूरज लाल अथवा पीला हो गया तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः उन्होंने हमें बीच की नमाज़- अस्र की नमाज़- से व्यस्त रखा।अल्लाह उनकी क़ब्रों तथा घरों को अग्नि से भर दे, अथवा फ़रमायाः उनके पेटों तथा क़ब्रों को आग से भर दो।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।मुश्रिकों ने ख़ंदक़ युद्ध के अवसर पर एक दिन नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और आपके सहाबा को पहरेदारी और मदीने की निगरानी में इतना व्यस्त रखा कि वे अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ सके और सूरज डूब गया। अतः, आप और आपके साथी सूरज डूबने के बाद ही अस्र की नमाज़ पढ़ पाए। यही कारण है कि आपने उनके हक़ में बददुआ की कि अल्लाह उनके पेटों, घरों तथा क़ब्रों को आग से भर दे। क्योंकि उन्होंने अस्र की नमाज़ से रोकने के साथ-साथ, जो सबसे उत्तम नमाज़ है, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके साथियों को कष्ट भी दिया था।
अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: "तीन आदमी ऐसे हैं, जिनको दोगुना सवाब मिलेगा। एक वह अह्ले किताब (यहूदी और ईसाई) जो अपने नबी पर ईमान लाया और फिर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाया। दूसरा वह ग़ुलाम जो अल्लाह का और अपने मालिकों का हक़ अदा करता रहा और तीसरा वह व्यक्ति जिसके पास कोई दासी हो, फिर वह उसे सदाचार सिखाए और अच्छी तरह सिखाए तथा शिक्षा दे और अच्छी से अच्छी शिक्षा दे और आज़ाद करके शादी कर ले, तो उसके लिए भी दोगुना सवाब है।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।अबू सफ़वान सुवैद बिन क़ैस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैं और मख़रमा अबदी ने हजर- एक स्थान का नाम- से कपड़ा मँगवाया तो अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे पास आए और कुछ पाजामों का मोल-तोल किया। मेरे पास एक वज़न करने वाला था, जो मज़दूरी लेकर वज़न करता था। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उससे कहाः "पूरा वज़न कर और (डंडी) झुकाकर दे।"
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- बरीरा- रज़यल्लाहु अन्हा- और उनके पति की घटना के संबंध में कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनसे कहाः "यदि तू उसके यहाँ लौट जाए, तो तुझे उसका सवाब मिलेगा।" उन्होंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! क्या आप मुझे आदेश दे रहे हैं? फ़रमायाः "मैं केवल सिफ़ारिश कर रहा हूँ।" उन्होंने कहाः "मुझे उसकी कोई ज़रूरत नहीं है।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अबू तल्हा- रज़ियल्लाहु अन्हु- मदीने में तमाम अनसार से ज़्यादा खुजूर के बाग वाले मालदार व्यक्ति थे तथा उनका सबसे प्रिय धन बैरूहा नामी बाग था, जो मस्जिद नबवी के सामने था। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) वहाँ जाते और और उसका मीठा पानी पीते थे। अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- फरमाते हैं कि जब यह आयत नाज़िल हुई कि “तुम नेकी नहीं प्राप्त कर सकते, जब तक अपनी पसंदीदा चीज़ों में से ख़र्च न करो।” तो अबू तल्हा-रज़ियल्लाहु अन्हु- ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सामने खड़े होकर कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! अल्लाह तआला फरमाता है कि "तुम नेकी को नहीं पहुँच सकते, जब तक अपनी पसंदीदा चीज़ें (अल्लाह की राह में) ख़र्च न करो" और मेरा सबसे प्रिय धन 'बैरूहा' है। इसलिए मैं उसे अल्लाह के लिए सदक़ा करता हूँ और अल्लाह के यहाँ उसे सवाब का ज़रिया तथा आख़िरत में उसके ज़ख़ीरा होने का उम्मीदवार हूँ। ऐ अल्लाह के रसूल! आप इसे अल्लाह की मंशा के अनुसार खर्च करें। यह सुन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः "बहुत ख़ूब, यह तो बहुत फायदेमंद माल है। यह तो वाकई लाभदायक धन है। जो कुछ तुमने कहा, उसे मैंने सुन लिया। मेरी राय यह है कि तुम इसे अपने रिश्तेदारों में बाँट दो।" अबू तल्हा- रज़ियल्लाहु अन्हु- ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं आपके आदेश का पालन करूँगा। अत: अबू तल्हा- रज़ियल्लाहु अन्हु- ने उसे अपने रिश्तेदारों और चचेरे भाइयों में बाँट दिया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मक्का विजय के वर्ष मक्का में प्रवेश किया तो आपके सिर पर लोहे की टोपी थी। जब उसे उतारा तो एक व्यक्ति ने आपके पास आकर कहा कि ख़तल का बेटा काबे के पर्दों से चिमटा हुआ है। सो, आपने फ़रमायाः उसका वध कर दो।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और क़ुरैश के काफ़िरों के बीच समझौता था तथा आपने कुछ मुश्रिकों के रक्त को हलाल कर दिया था और उनको क़त्ल करने का आदेश दे दिया था। जब मक्का विजय हो गया, तो आप उसमें सावधानी के साथ दाख़िल हुए। आपके सर पर फौलादी टोपी थी। कुछ सहाबा ने ख़तल के बेटे को काबा के परदों से चिमटा हुआ पाया। उसने क़त्ल से बचने के लिए काबा की हुरमत की शरण ले रखी थी। क्योंकि उसे अपने कुकर्मों के बारे में पता था। सहाबा ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से संपर्क किए बिना उसे वध करने को मुनासिब न जाना। जब आपसे पूछा, तो फ़रमाया कि उसे क़त्ल कर दो। चुनांचे उसे हजर-ए-असवद और मक़ाम-ए-इबराहीम के बीच क़त्ल कर दिया गया।
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उमर- रज़ियल्लाहु अन्हु- को ज़कात का माल वसूल करने के लिए भेजा। इसी बीच कहा गया कि बिन जमील, खालिद बिन वलीद और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के चचा अब्बास ने ज़क़ात अदा करने ने से मना कर दिया है। अतः अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः बिन जमील केवल इस वजह से इनकार कर रहा है कि वह निर्धन था तो अल्लाह ने उसे धनी बना दिया। रही बात ख़ालिद की तो तुम उनपर अत्याचार कर रहे हो। उन्होंने अपने कवचों और युद्ध के सामानों को अल्लाह के मार्ग में न्योछावर कर रखा है और रही बात अब्बास की तो उनकी ज़कात तथा उसके बराबर और भी मुझपर है। फिर फ़रमायाः ऐ उमर! क्या आपको पता नहीं कि आदमी का चचा उसके बाप के समान होता है?
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) को ज़कात इकट्ठा करने के लिए भेजा। जब वह ज़कात वसूल करने के लिए अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास गए, तो उन्होंने ज़कात रोक ली। यही काम ख़ालिद बिन वलीद और इब्न-ए-जमील ने भी किया। उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और तीनों की शिकायत की, तो आपने कहा : इब्न-ए-जमील के पास ज़कात न देने का कोई उचित कारण नहीं है। सच्चाई यह है कि वह निर्धन था और अल्लाह ने उसे धनी बना दिया। अतः, होना तो यह चाहिए था कि वह सबसे पहले ज़कात देता! तथा जहाँ तक ख़ालिद की बात है, तो तुम यह कहकर कि उसने ज़कात देने से मना कर दिया है, उसपर अत्याचार कर रहे हो। उसने अपने कवचों और युद्ध के सामानों को अल्लाह की राह में वक़्फ़ कर रखा है। भला ऐसा कैसे हो सकता है कि एक व्यक्ति जो अनिवार्य न हो वह दे और जो अनिवार्य हो उसे रोक ले? और जहाँ तक अब्बास की बात है, तो उनकी ज़कात की जिम्मेेेेवारी स्वयं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ले ली। यह भी हो सकता है कि आपने ऐसा उनके विशिष्ट स्थान के कारण किया। इसका प्रमाण आपका यह कहना है : "क्या तुम्हें पता नहीं कि आदमी का चचा उसके पिता समान होता है?"
अब्दुल्लाह बिन हुनैन कहते हैं कि अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- और मिसवर बिन मख़रमा- रज़ियल्लाहु अन्हु- के बीच अबवा नामी स्थान में एक बात के बारे में मतभेद हो गया। अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- का कहना था कि आदमी, एहराम की अवस्था में अपना सिर धो सकता है, जबकि मिसवर- रज़ियल्लाहु अन्हु- का कहना था कि धो नहीं सकता। अब्दुल्लाह बिन हुनैन कहते हैंः ऐसे में, अब्दुल्लाह बिन अब्बास ने मुझे अबू अय्यूब अंसारी- रज़ियल्लाहु अन्हु- के पास भेजा। मैंने पाया कि वह दो खूँटों के बीच स्नान कर रहे थे और कपड़े से आड़ किए हुए थे। मैंने उन्हें सलाम किया तो पूछाः कौन? मैंने कहाः मैं अब्दुल्लाह बिन हुनैन हूँ। मुझे अब्दुल्लाह बिन अब्बास ने आपके पास यह पूछने के लिए भेजा है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) एहराम की अवस्था में कैसे अपना सिर धोते थे? यह सुनकर अबू अय्यूब ने कपड़े पर हाथ रखकर उसे झुकाया, ताकि उनका सिर दिखने लगे। फिर एक व्यक्ति से, जो उनके शरीर पर पानी डाल रहा था, अपने सिर पर पानी डालने को कहा। उसने पानी डाला तो अपने दोनों हाथों से सिर के बालों को हिलाया, उन्हें आगे से पीछे ले गए और पीछे से आगे ले आए और उसके बाद फ़रमायाः मैंने आप (सल्लल्लाहु अलैहि वल्लम) को इसी तरह स्नान करते देखा है। दूसरी रिवायत में है कि मिसवर ने अब्दुल्लाह बिन अब्बास से कहाः मैं कभी आपसे तर्क-वितर्क नहीं करुँगा।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।अब्दुल्लाह बिन अब्बास और मिसवर बिन मखरमा -रज़ियल्लाहु अनहुम- के बीच एहराम की अवस्था में सर धोने अथवा न धोने के बारे में बात चल पड़ी। संदेह इस बात पर था कि यदि आदमी एहराम की हालत में अपने सर के बालों को हिलाए, तो इससे कुछ बालों के झड़ने की संभावना रहती है। चुनांचे दोनों ने अब्दुल्लाह बिन हुनैन को अबू अय्यूब -रज़ियल्लाहु अनहु- के पास भेजा। वह पहुँचे तो अबू अय्यूब -रज़ियल्लाहु अनहु- स्नान कर रह थे।अब्दुल्लाह बिन हुनैन ने कहा कि मुझे अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- ने आपके पास भेजा है। वह आपसे जानना चाहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एहराम की अवस्था में कैसे स्नान करते थे? यह सुन, उन्होंने परदा के तौर पर लटके हुए कपड़े को थोड़-सा नीचे किया कि उनका सर दिख जाए और फिर पानी डालने वाले से कहा कि पानी डालो।फिर दोनों हाथों से सर के बालों को इस तरह हिलाया कि हाथों को आगे से पीछे ले गए और पीछे से आगे ले आए और फिर कहा : मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को ऐसा ही करते देखा है। जब अब्दुल्लाह बिन हुनैन वापस आए और दोनों को बताया कि अब्दुल्लाह बिन मसऊद का मत ही सही है, तो चूँकि वे सदा सत्य के तलबगार रहते थे, इसलिए मिसवर ने अपनी बात वापस ले ली और अब्दुल्लाह बिन अब्बास की श्रेष्ठता को स्वीकार करते हुए कहा कि मैं कभी आपसे बहस नहीं करूँगा।
जाबिर- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि हम लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ हज के लिए तल्बिया पुकारते हुए आए तो आपने हमें आदेश दिया और हमने उसे उमरा में बदल दिया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।जाबिर -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- बता रहे हैं कि सहाबा किराम अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हज्जतुल वदा के अवसर पर आए, तो अधिकतर लोग हज का तलबिया पुकार रहे थे। यानी उन्होंने हज-ए-इफ़राद का इरादा किया था। ऐसे में नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने साथ में क़ुरबानी का जानवर न लाने वालों से कहा कि हज का इरादा बदलकर उमरा का इरादा कर लें, ताकि उमरा के बाद से लेकर हज तक हलाल रहकर लाभ उठाने का अवसर मिल जाए। चुनांचे लोगों ने ऐसा ही किया।