





























Hadeeth Cards
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अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि उकाज़, मजिन्ना और ज़ुल-मजाज़ जाहिलियत काल के बाज़ार थे। पर सहाबा ने हज के दिनों में व्यापार करने को पाप समझा, तो यह आयत उतरीः "ليس عليكم جناح أن تبتغوا فضلاً من ربكم" (अर्थातः तुमपर इसमें कोई गुनाह नहीं है कि अपने पालनहार की अनुकंपा- आजीविका- तलाश करो।) (सूरा अल-बक़राः 198) हज्ज के दिनों में।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-ने युद्ध के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए घोड़ों के बीच हफ़या से सनीयतुल वदा तक घुड़दौड़ कराई और बिना तैयार किए गए घोड़ों के बीच सनीया से बनू ज़ुरैक़ की मस्जिद तक घुड़दौड़ कराई। अब्दुल्लाह बिन उमर कहते हैंः मैं भी इस घुड़दौड़ में भाग लेने वालों में था। सुफ़यान कहते हैंः हफ़या से सनीयतुल वदा की दूरी पाँच या छः मील है, जबकि सनीया से बनू ज़ुरैक़ की मस्जिद की दूरी एक मील है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जिहाद के लिए तैयार रहते, उसके माध्यमों तथा असबाब को तैयार रखते थे, अल्लाह के इस क़ौल पर अमल करते हुए किः (जितना हो सके, उनके मुकाबले के लिए भर पूर ताक़त और घोड़े तैयार करो, जिस से तुम अल्लाह के शत्रुओं और तुम्हारे शत्रुओं के दिलों में भय पैदा कर दो) इसी कारण आप घोड़ों को खिला पिला कर शक्तिशाली बनाते तथा सहाबा को घोड़ सवारी की शिक्षा के लिए, उस पर मुक़ाबला कराते थे, तथा तैय्यार शुदा घोड़ों की अलग सीमाऐं और दुसरे घोड़ों की अलग सीमाऐं होती थीं, ताकि घोड़े शिक्षित हों और सहाबा जिहाद की स्थिति में रहें। इसी कारण तैयार किए गए घोड़ों के बीच छे मील तथा साधारण घोड़ों के बीच एक मील तक घोड़ दौड़ की परतियोगिता करवाई। अब्दुल्लाह बिन उमर इस में शामिल होने वाले नौजवान सहाबा में थे।
उमर बिन खत्ताब- रज़ियल्लाहु अन्ह- ने लोगों से, किसी अत्याचार के नतीजे में गर्भपात के बारे में परामर्श किया, तो मुग़ीरा बिन शोबा ने कहाः मैंने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को इस मामले में, दियत के तौर पर एक दास अथवा दासी देने का निर्णय करते देखा है। उनकी बात सुनकर उमर- रज़ियल्लाहु अन्ह- ने कहा कि कोई गवाह लाओ, जो तुम्हारे साथ गवाही दे, तो मुहम्मद बिन मसलमा ने उनके साथ गवाही दी।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।किसी महिला ने उस पर हुए अत्याचार के कारण जन्म के समय से पुर्व ही अपने बच्चे को जन्म दिया जिस की पेट ही में मृत्यु हो चुकी थी । हज़रत उमर -जो एक इन्साफ तथा न्याय करने वाले खलीफ़ा थे- सहाबा तथा बुद्धिमान उलमा से समस्याओं तथा मुद्दों के बारे परामर्श किया करते थे। जब इस महिला ने मरा हुआ बच्चा जन्म दिया, तो उसकी दियत का हुक्म उन की समझ में न आया, चुनांचे उन्हों ने सहाबा से परामर्श किया, तो मुग़ीरा ने बतायाः कि उन्हों ने ऐसे ही एक मामले में रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को एक दास अथवा दासी को दासत्व मुक्त करने का निर्णय करते हुए देखा है। उमर ने इस हुक्म को अधिक सिध्द करना चाहा, इस लिए कि यह निर्णय क़यामत तक के लिए विधि -क़ानून- बनेगा, इसी लिए मुग़ीरा से कहा किः वह अपने कथन की सच्चाई तथा हदीस की सटीकता पर साक्षी ले आएं। तो मुहम्मद बिन मसलमा ने उनकी बातों की पुष्टी की।
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि हुज़ैल क़बीले की दो स्त्रियाँ आपस में लड़ पड़ीं और उनमें से एक ने दूसरे को पत्थर मारकर, उसकी तथा उसके गर्भ में पलने वाले बच्चे की हत्या कर दी। फिर वे नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास निर्णय के लिए पहुँचे, तो अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने निर्णय दिया कि बच्चे की दियत के तौर पर एक दास अथवा दासी देनी है। आपने यह भी निर्णय दिया कि हत्या में संलिप्त महिला की ओर से दियत उसके रिश्ते-नाते वाले अदा करेंगे, जबकि निहत महिला के वारिस उसके बच्चे एवं अन्य उत्तराधिकारी होंगे। यह सुनकर हमल बिन नाबिग़ा हुज़ली खड़ा होकर कहने लगाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं उसका तावान कैसे भरूँ, जिस ने न खाया न पिया, न बोला न चीखा! तो आपने उसकी तुकबंदी देखकर फ़रमायाः "यह तो काहिनों का भाई लगता है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।हुज़ैल गोत्र की दो सौकनों ने आपस में झगड़ा किया, तो एक ने दुसरे को एक छोटे पत्थर से मार दिया, जो प्रायः क़तल नहीं करता, किन्तु इस से वह मर गई और उसके गर्भ के बच्चे की भी मौत हो गई। तो, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने निर्णय दिया कि बच्चे की दियत दास अथवा दासी होगी, चाहे भ्रूण पुरुष हो या स्त्री और दियत क़त्ल करने वाली पर होगी। एवं मरने वाली महिला के लिए दियत का फ़ैसला किया, इस लिए कि उसका क़त्ल शिब्हे अमद (जान बूझ कर हत्या करने जैसा) है और दियत कतल करने वाली महिला के रिश्तेदारों पर होगी, इस लिए कि आक़िलह (जिन रिश्तेदारों पर दियत अदा करने की ज़िम्मेवारी हो) की बुन्याद आपसी सहायता पर है (यानी रिश्तेदारों में वही दियत देंगे जो सहायता करने की क्षमता रखते हों, इसी लिए बच्चे और औरतें आदि आग़िलह में शामिल नहीं हैं) और इस लिए कि क़त्ल भूल से हुआ है। और चूँ कि दियत -खून बहा- मक़तूलह के बाद बपौती है।अतः उसके लड़के तथा दुसरे वारिस ले लेंगे, रिश्तेदारों (आक़िलह) के लिए कुछ नहीं होगा। तो ह़मल बिन नाबेग़ा -कतल करने वाली के पिता ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, क्यों हम पर उस भ्रूण का जुर्माना डाला जा रहा है, जो मरा हुआ पैदा हुआ है, न खाया है और न ही पिया है और न ही कुछ बोला है कि उस्के प्राण धारण का ज्ञात हो? यह बात उन्हों ने भाषण और काफ़िया बंदी के अंदाज में कही। तो नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को उसकी बात पसंद न आई, क्योंकि उसमें लोगों के धनों को अवैध तरीके से खाने वाले काहिनों की बातों से मिलते जुलते अंदाज़ में शरई विधान का इंकार है।
अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि एक बच्ची का सिर दो पत्थरों के बीच रखकर कुचला हुआ पाया गया, तो उससे कहा गया कि किसने तेरे साथ ऐसा किया है? क्या अमुक ने किया है? क्या अमुक ने किया है? यहाँ तक कि जब एक यहूदी का नाम आया, तो उसने सिर से इशारा किया कि हाँ। अतः, उस यहूदी को पकड़ लिया गया और उसने जुर्म स्वीकार भी कर लिया। चुनांचे नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने आदेश दिया कि उसके सिर को दो पत्थरों के बीच रखकर कुचल दिया जाए। मुस्लिम तथा नसई में है किः एक यहूदी ने एक बच्ची की (अथवा एक दासी की) हत्या चाँदी के ज़ेवरों के कारण कर दी, जो वह पहनी हुई थी। अतः अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उस से किसास लेने का आदेश दिया)।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने में एक बच्ची मिली, जिस्का सर दो पथ्तरों के बीच कुचल दिया गया था, किन्तु अभी सांसें बाकी थीं, तो लोगों ने उस से हत्यारे के बारे पूछा और जो हत्यारा समझे जा रहे थे, उनका नाम लेने लगे यहाँ तक कि एक यहूदी का नाम आया, तो उस ने सर से इशारा किया कि हाँ, यही। अतः यहूदी को पकड़ लिया गया और उसने जुर्म स्वीकार कर लिया कि चाँदी के ज़ेवर के कारण उसे कतल किया है। नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने आदेश दिया कि उस के साथ भी वही किया जाए जो उसने किया है, चुनांचे उसका सर भी दो पत्थरों के बीच कुचल दिया गया।
अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि यहूदियों ने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर कहा कि उनमें से एक पुरुष एवं एक स्त्री ने व्यभिचार किया है। अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनसे कहा कि तुम तौरात में संगसार के बारे में क्या लिखा पाते हो? उन्होंने कहाः हम ऐसे लोगों को अपमानित करते हैं और कोड़े लगाते हैं। उनकी बात सुनकर अब्दुल्लाह बिन सलाम ने कहाः तुम झूठ बोलते हो। उसमें संगसार का आदेश मौजूद है। अतः, वे तौरात ले आए और उसे खोलकर रख दिया। फिर उनमें से एक व्यक्ति ने संगसार की आयत पर अपना हाथ रखकर आगे-पीछे की आयतें पढ़कर सुना दिया। यह देख, अब्दुल्लाह बिन सलाम ने कहाः अपना हाथ उठाओ। उसने हाथ उठाया, तो संगसार की आयत मौजूद थी। अब उसने कहाः ऐ मुहम्मद, अब्दुल्लाह बिन सलाम की बात सही है। अतः, नबी- सल्लल्लाहु अलैहि सल्लम- ने उन दोनों को संगसार करने का आदेश दिया और उन्हें संगसार कर दिया गया। वर्णनकर्ता कहते हैं कि मैंने देखा कि वह व्यक्ति उस स्त्री पर गिर-गिरकर उसे पत्थर से बचा रहा था।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।एक बार नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के ज़माने में एक यहूदी मर्द और महिला ने (ज़िना) अवैध संभोग किया, तो वह लोग आप के पास निर्णय के लिए आए, इस सोच के साथ कि हो सकता है आप कि यहाँ तौरात के विपरीत कोई आसान आदेश मिल जाए। अतः नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उन से तौरात में मौजूद हुक्म के बारे पूछा, ताकि उन्हें रुस्वा किया जाए, न कि उस पर अमल किया जाए, तो उन लोगों ने आप को झुठलाया और कहाः हमारे यहाँ दोनों का अपमान किया जाता है, तो अब्दुल्लाह बिन सलाम ने उन्हें झुठलाया और जब तौरात खोली गई, तो शादी शुदा ज़ानी का हु्कम संगसार पाया गया, फिर नबी सल्लल्लाहु अलै व सल्लम के आदेश अनुसार उन्हें संगसार कर दिया गया। हमारी शरीयत दूसरी शरिअतों पर हाकिम तथा उसे निरस्त करती है, लेकिन नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने तौरात में रज्म के बारे पूछा, ताकि उन की ही पुस्तक से उन पर दलील क़ायम करें और यह बताएं कि अल्लाह की सारी पुस्तकें इस सदैव रहने वाले आदेश पर एकमत हैं, जिस के माध्यम से उपद्रव मचाने वालों को रोका जाता है।
इमरान बिन हुसैन- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि एक आदमी ने दाँत से एक आदमी का हाथ काट लिया। उसने अपना हाथ काटने वाले के मुँह से खींचा, तो उसके सामने के दाँत गिर गए। ऐसे में, दोनों नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास निर्णय के लिए आए। आपने फ़रमायाः "कोई अपने भाई को ऐसे दांत से काटता है, जैसे साँड़ काटता है। तुझे कोई दियत नहीं मिलेगी।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।एक आदमी ने दूसरे आदमी पर अत्याचार करते हुए उसका हाथ दाँतों से काट लिया, जब उस ने हाथ काटने वाले के मुख से जोर से हाथ निकाला तो उसके सामने के दो दाँत गिर गए, चुनांचे दोनों मामला लेकर नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए। काटने वाला अपने गिरे हुए दोनों दाँतों का क़िसास माँग रहा था और दुसरा व्यक्ति बचाव करते हुए कह रहा था कि वह अपना हाथ बचाना चाहता था। अतः नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने काटने वाले को डाँटते हुए फ़रमायाः कैसे कोई वह कार्य करता है, जो कार्य बड़े भारी भरकम जानवर करते हैं? और फ़रमायाः तुम में से कुछ लोग अपने भाई का हाथ चिबा जाते हैं फिर जुर्म करने वाले दाँतों की दियत माँगने आते हैं? तुम्हारी कोई दियत नहीं, क्योंकि आरंभ करने वाला ही अत्याचारी है।
आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि कुरैश को एक मख़ज़ूमी स्त्री के मामले ने चिंतित किया, जिसने चोरी की थी। उन्होंने कहा कि इसके बारे में कौन अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से बात कर सकता है? फिर उन्होंने कहा कि इस कार्य की जुर्रत अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के प्रिय उसामा बिन ज़ैद (रज़ियल्लाहु अंहुमा) के सिवा कोई नहीं कर सकता। अंततः उसामा ने आपसे बात की, तो आप ने फ़रमायाः "क्या तुम अल्लाह की ओर से एक निर्धारित दंड के बारे में सिफ़ारिश करने आए हो?" फिर खड़े हुए और ख़ुतबा देते हुए फ़रमायाः "तुमसे पहले के लोगों का विनाश केवल इस बात ने किया कि जब उनमें से कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति चोरी करता, तो छोड़ देते और जब कोई असहाय व्यक्ति चोरी करता, तो उसे दंड देते। अल्लाह की क़सम, अगर मुहम्मद की बेटी फ़ातिमा भी चोरी करती, तो मैं उसका भी हाथ काटता।" तथा एक रिवायत में हैः एक औरत सामान माँगकर लेती और देने से इनकार कर देती थी। अथः, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसका हाथ काटने का आदेश दिया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।एक मख़ज़ूमी महिला लोगों से उनके सामान बहाना बनाकर लेती थी, फिर इनकार कर जाती। एक बार उस ने एक ज़ेवर लिया और इनकार कर दिया, लेकिन खोज के बाद उसी के पास पाया गया और यह बात नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को पहुंची, तो आपने हद लागू करने का पुख्ता इरादा कर लिया। वह महिला शरीफ़ घराने की थी, इस लिए क़ुरैश को उसकी और उस पर लागू होने वाली हद की चिंता सताने लगी और सोच विचार में लग गए कि कौन अल्लाह के नबी से इसे क्षमा कर देने के मामले में बात करेगा, तो उन्हें नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के प्यारे उसामा बिन ज़ैद के सिवा कोई नहीं दिखा, चुनांचे उसाम ने आप से बात की, तो आप ग़ुस्से के मारे लाल हो गए और फ़मायाः क्या तुम अल्लाह की सीमा के बारे अनुशंसा करने आए हो))? फिर आप ने लोगों को सीमाओं को नाकारह करने वाले अनुशंसा की संगीनी समझाई और क्योंकि यह मामला उन में से बहुत से लोगों के लिए महत्वपूर्ण था , इस लिए उन्हें बताया कि पहले के लोगों का दीन तथा दुनिया के मामले में विनाश हुआ, क्योंकि वह लोग कमज़ोरों पर निर्दिष्ट दंड लागू करते और ताक़तवरों तथा धनी को छोड़ देते थे, जिस कारण उपद्रव और अशासन फैल जाता था, तो उन पर अल्लाह का क्रोध उतरता था। फिर आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने क़सम खाई -जबकि आप तो सच्चे हैं ही- और फ़रमायाः यदि सारी दुनिया की महिलाओं की सरदार आप की बेटी फ़ातिमा भी ऐसा कर्म करती, तो आप उस पर भी अल्लाह का आदेश लागू करके रहते।
अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि हमने मर्रुज़ ज़हरान में एक खरगोश का पीछा किया। और लोग भी उसके पीछे दौड़े, लेकिन थक गए। अलबत्ता, मैंने पकड़ लिया। उसे लेकर अबू तलहा के पास आया, तो उन्होंने ज़िबह किया और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को उसका नितंब एवं दोनों रान भेज दिए। आपने उसे ग्रहण कर लिया।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- और आपके सहाबा एक यात्रा में थे। इस दौरान शायद मर्रुज़ ज़हरान नामी एक स्थान में रुके। यह वही स्थान है, जहाँ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने साथियों के साथ मक्का विजय के साल रुके थे। इसी बीच उन्होंने एक खरगोश का पीछा किया। बड़ी संख्या में लोग उसके पीछे दौड़े, लेकिन थक हारकर वापस हो गए। अनस बिन मालिक -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो-, जिन्होंने उन दिनों यौवन की दहलीज़ में क़दम रखा ही था, ने उसे पकड़ लिया और अपनी माता के पति अबू तलहा -अल्लाह उनसे प्रसन्नन हो- के पास ले गए। चुनांचे, उन्होंने उसे ज़बह करके अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को दोनों रान तथा कूल्हा भेजा, तो आपने उसे स्वीकर कर लिया और शायद खाया भी।